समान शिक्षा का अधिकार
नेताओं और अमीरों के बच्चे पढ़ेंगे Private इंग्लिश मीडियम स्कूल में, लाखों रुपए फीस वाले International स्कूलों में!
जबकि गरीब जनता के बच्चे सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में!
और सरकारी स्कूलों की शिक्षा का स्तर तो आपको पता ही है!
बताइये जब NDA, CDS, UPSC, NEET, GATE जैसे कॉम्पटीशन में सरकारी स्कूलों के बच्चे इंटरनेशनल स्कूल में पढ़े बच्चों से Compete करेंगे तो Result क्या ही होगा?
क्या सरकारी स्कूल में International स्कूलों के जैसा Exposure मिलता है?
अरे Exposure छोड़िए, दोनों के Syllabus में ही जमीन कसैका अंतर है।
सरकारी स्कूल में जितने रूपयों में सालभर के पूरे कोर्स की किताबें आ जाएं, उतनी तो प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ एक ही किताब की कीमत होती है।
और ऊपर से फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर EWS कोटा भी ले जाते हैं ये प्राइवेट स्कूलों के पढ़े हुए लोग।
सरकार को आरक्षण सिर्फ उसको ही देना चाहिए जो पूर्णतया सरकारी स्कूलों में पढ़ा हो फिर चाहे वो SC/ST/OBC कैटेगरी से हो या फिर EWS वाला।
क्योंकि जो लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने की फीस उठाने का माद्दा रखते हैं उनको Economically Weaker Section नहीं कहा जा सकता।
और QUOTA शोषितों, वंचितों और पिछड़े लोगों के लिए होता है ना कि साधन सम्पन्न लोगों के लिए।
अगर सरकार सरकारी कर्मचारियों और नेताओं के बच्चों को सिर्फ सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाने का आदेश पारित कर दे तो सरकारी स्कूलों की दशा अपने आप सुधर जाएगी।
और साथ ही अगर सरकार पूरे देश के प्राइवेट स्कूल और सरकारी स्कूलों में "एक कक्षा, एक पाठ्यक्रम" के तहत Syllabus एक जैसा कर दे तो कम से कम गरीबों और अमीरों के बच्चों को Playing Field तो एक जैसी मिल पाएगी।
और फिर इसके बाद जिसकी जितनी मेहनत, उसका वैसा Result🙏

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