एक और नया साल

थोड़ी खुशियां थोड़े आंसू देकर एक नया साल बीत गया।

और नई उम्मीदों का बोझ लिए फिर से एक नया साल आ गया।।


पर ऐ नये साल अगर तू नया है तो नई सुबह नई शाम दिखा।

वरना हमारी आँखों ने तो ऐसे कई नए साल देखें हैं।।


बीते साल के कुछ अंधेरे थे तो कुछ चांदनी रातें भी जरूर होंगी।

आंसुओं की बारिश थी तो कुछ मुस्कान भरी बातें भी रही होंगी।। 


खैर चलो पुरानी नफरत और गमों को अब दिल से निकाल दो।

और बीते साल का कैलेण्डर उतारकर दीवार पर नया टांग दो।।


फिलहाल खुश हो जाओ कि अभी जनवरी है एक नया साल है।

आपसे तो मैं दिसम्बर में पूछूंगी कि जनाबे आली क्या हाल हैं।।

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