बदलते रिश्तों का वक्त

वक्त की भी क्या फितरत है साहब।

वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है।।

बदलते रिश्तों के साथ वो भी बदल जाता है।

जो कभी हमदर्द बनते थे वो दर्द बन जाते हैं।।

उन लोगों के बदलने का गम नहीं है मुझको।

 मैं तो बस उन पर किए यकीन पर शर्मिंदा हूँ।।

मतलबी लोगों ने रिश्तों का क्या खूब मतलब समझाया।

अपना मतलब पूरा करने के लिए कभी छोड़ा कभी अपनाया।।

Comments

Popular posts from this blog

एक और नया साल

अमेरिकी कृषि उत्पादों पर जीरो टैरिफ कैसे भारतीय बाजार को प्रभावित करेगा?