सेना की कर्नल को आतंकवादियों की बहन कहने वाले मंत्री को भाजपा सरकार में क्यों मिल रहा है संरक्षण?
May 2025 को "आपरेशन सिंदूर" के दौरान मध्यप्रदेश के Tribal Affairs Minister विजय शाह ने Indian Army की कर्नल सोफिया कुरैशी को "आतंकवादियों की बहन" कहा था जिस पर सरकार और प्रशासन के कोई एक्शन ना लेने पर हाईकोर्ट को स्वत: संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का आदेश देना पड़ा था।
लेकिन मंत्रीजी को गिरफ्तार करने की जगह मामले की जांच के लिए SIT कमेटी बना दी गई जबकि सार्वजनिक बयानबाजी की वीडियो फुटेज उपलब्ध थी और मंत्रीजी के खिलाफ FIR का आदेश देने वाले हाइकोर्ट के जज अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर कर दिया गया।
उस जांच कमेटी ने 3-4 महीने बाद अगस्त 2025 में मंत्री Vijay Shah के खिलाफ सांप्रदायिकता और शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए Section 196 BNS के तहत अपराधिक केस चलाने की सिफारिश की लेकिन MP सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया।
फिर 5-6 महीने बाद जनवरी 2026 में सुप्रीमकोर्ट ने संज्ञान लिया कि मंत्री विजय शाह के मामले में दी गई SIT रिपोर्ट तो मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के पास अगस्त 2025 से लम्बित पड़ी है और तब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने MP CM मोहन यादव की सरकार को आदेश दिया कि 2 हफ्तों के अंदर सरकार मंत्री Vijay Shah के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे।
लेकिन 2 हफ्ते की deadline भी 2 फरवरी 2026 को पूरी हो गई फिर भी MP की भाजपा सरकार ने मंत्री जी पर कोई एक्शन नहीं लिया
और अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में दोबारा SIT जांच कराने की मांग करते हुए बार बार ज्यादा समय मांगकर टाइमपास कर रही है लेकिन मंत्रीजी का इस्तीफा अभी तक नहीं लिया गया।
अब बताइये अगर ऐसे अपराधी छवि वाले मंत्री सरकार में Tribal Minister के पद पर होंगे तो क्या Tribals को न्याय मिलेगा?
ऐसे मंत्री तो सरकार में रहकर जनता की सेवा करने की जगह जेल जाने से बचने के लिए खुद की हर संभव मदद करेंगे और उम्मीद है कुछ समय बाद उनका केस भी वापस ले लिया जाएगा।
हास्यास्पद यह है कि भाजपा की राज्य सरकार अपने मंत्रियों पर अपराधिक मामलों को कोर्ट में लटकाकर रखती है और भाजपा की केंद्र सरकार लम्बित कोर्ट केसों के जल्दी निपटान के लिए संसद में भारतीय दंड संहिता (IPC) में बदलाव का संशोधन लाकर बिल पारित करती है।🤣
मेरे हिसाब से सरकार के इस रवैए को तो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का मजाक बनाना या फिर संविधान के नियमों की अवहेलना ही कहा जाएगा।
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