वक्त के साथ हालात भी बदल जायेंगे तुम कोशिश तो करो

 फिर सारे गम भुला कर एक बार मुस्कुराओ तो सही।

जाति धर्म की जंजीरें तोड़ कर बाहर आओ तो सही।।

इस नफरती समाज से तोड़ लो सारे मतलब के रिश्ते।

कुछ हसीन लम्हें खुद के साथ भी बिताओ तो सही।।

जमाने से खुशियों की उम्मीद करना भूल होगी तेरी।

अपनी खुशियाँ जमाने से छीनकर दिखाओ तो सही।।

तुम्हें खुद बदलनी होंगी अपनी किस्मत की लकीरें।

जुल्म के ख़िलाफ एक बार आवाज उठाओ तो सही।।

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